पंजाब से बंगाल तक केवल राजा या लश्कर के लोग ही नहीं अपितु हर असल हिंदू व्यक्ति अपनी शमशीर ताने क्यों खड़ा था? सन् 1857 की क्रांति पर लिखा एक लेख किसी हिंदू ने उसी समय इंग्लैंड में प्रकाशिात कराया था। उसमें वह हिंदू कहता है-’’जिन्होंने अवबध के नवाब को जन्म से भी कभी नहीं देखा था और न आगे देखने की संभावना थी, ऐसे कितने ही सरल और दयालु लोग अपनी-अपनी झोंपड़ियों में नवाब पर आ पड़े दुःखों को कहते जार-जार रोते थे,
पंजाब से बंगाल तक केवल राजा या लश्कर के लोग ही नहीं अपितु हर असल हिंदू व्यक्ति अपनी शमशीर ताने क्यों खड़ा था? सन् 1857 की क्रांति पर लिखा एक लेख किसी हिंदू ने उसी समय इंग्लैंड में प्रकाशिात कराया था। उसमें वह हिंदू कहता है-’’जिन्होंने अवबध के नवाब को जन्म से भी कभी नहीं देखा था और न आगे देखने की संभावना थी, ऐसे कितने ही सरल और दयालु लोग अपनी-अपनी झोंपड़ियों में नवाब पर आ पड़े दुःखों को कहते जार-जार रोते थे,