इसकी कल्पना आपको नहीं हैं। और ऐसे आंसु बह जाने के बाद, जैसे स्वयं पर ही क्रूर प्रहार हो रहे हों, ऐसा मानकर वाजिद अली शाह के अपमान का बदला लेने की प्रतिज्ञा कितने सिपाही प्रतिदिन कर रहे थे, यह भी आपको ज्ञात नहीं ं ।’’
इन सिपाहियों को उससे सहानुभूति क्यों होने लगी और जिन्होंने नवाब को जन्म से नहीं देखा था उनकी आंखें और कंठ क्यों भर आए? अतः अवध का राज्य हड़पने से विद्रोह नहीं उपजा अपितु इन राज्यों को हड़पने में जिस तत्त्व का हनन हो रहा था
इसकी कल्पना आपको नहीं हैं। और ऐसे आंसु बह जाने के बाद, जैसे स्वयं पर ही क्रूर प्रहार हो रहे हों, ऐसा मानकर वाजिद अली शाह के अपमान का बदला लेने की प्रतिज्ञा कितने सिपाही प्रतिदिन कर रहे थे, यह भी आपको ज्ञात नहीं ं ।’’
इन सिपाहियों को उससे सहानुभूति क्यों होने लगी और जिन्होंने नवाब को जन्म से नहीं देखा था उनकी आंखें और कंठ क्यों भर आए? अतः अवध का राज्य हड़पने से विद्रोह नहीं उपजा अपितु इन राज्यों को हड़पने में जिस तत्त्व का हनन हो रहा था