के कारण वह वृद्ध कुंवर सिंह अपने जगदीशपुर के महल में मूंछों पर ताव देता खड़ा था। वृद्ध युवा-हां, वह वृद्ध युवा था। क्योंकि आज तक अस्सी शरद् ऋतुएं देह पर से उतर गई थीं, परंतु उसकी आत्मा का तेज अभी भी जीवित अंगार-सा दहकता है। अब तक लगभग अस्सी ग्रीष्म ऋतु, अपनी प्रखर धूप से चमचमा चुकी थीं तब भी उसकी भुजलता अभी युवा ही बनी हुई है। अस्सी वर्ष का कुंवर सिंह-अस्सी वर्ष का कुमार! और उसमें भी सिंह! उसके देश
के कारण वह वृद्ध कुंवर सिंह अपने जगदीशपुर के महल में मूंछों पर ताव देता खड़ा था। वृद्ध युवा-हां, वह वृद्ध युवा था। क्योंकि आज तक अस्सी शरद् ऋतुएं देह पर से उतर गई थीं, परंतु उसकी आत्मा का तेज अभी भी जीवित अंगार-सा दहकता है। अब तक लगभग अस्सी ग्रीष्म ऋतु, अपनी प्रखर धूप से चमचमा चुकी थीं तब भी उसकी भुजलता अभी युवा ही बनी हुई है। अस्सी वर्ष का कुंवर सिंह-अस्सी वर्ष का कुमार! और उसमें भी सिंह! उसके देश