1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

खां ने शिवाजी को ऐसे ही मिलने का निमंत्रण दिया था। उस चतुर राजपूत ने तब ही जाना कि पटना के चीफ कमिश्नर का यह प्रेम निमंत्रण माने कैदखाने का दरवाजा किसी भी प्रतिकार के बिना खोल देना था। इसलिए उसने भी उŸार भेजा-’’आभारी हूं। मेरा स्वास्थ्य आप लिखते हैं वैसे-मैं सचमुच बहुत अस्वस्थ हूं और इसीलिए अभी पटना नहीं आ सकता। मैं स्वस्थ होते ही तुरंत वहां आता हूं।’’

कुंवर सिंह! ‘अस्वस्थता’ सुधारने को जो औषधि चाहिए


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खां ने शिवाजी को ऐसे ही मिलने का निमंत्रण दिया था। उस चतुर राजपूत ने तब ही जाना कि पटना के चीफ कमिश्नर का यह प्रेम निमंत्रण माने कैदखाने का दरवाजा किसी भी प्रतिकार के बिना खोल देना था। इसलिए उसने भी उŸार भेजा-’’आभारी हूं। मेरा स्वास्थ्य आप लिखते हैं वैसे-मैं सचमुच बहुत अस्वस्थ हूं और इसीलिए अभी पटना नहीं आ सकता। मैं स्वस्थ होते ही तुरंत वहां आता हूं।’’

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