थी वही लेकर दानापुर के विद्रोही सिपाही जगदीशपुर आ पहुंचें फिर अब इहरना किसके लिए? तेरी देशमाता की शपथ है, तेरे स्वधर्म की शपथ है, तेरे मानभंग की शपथ है, कुंवर सिंह म्यान फेंक दे और स्वतंत्रता के लिए तलवार खींच! तू हमारा राजा, तू हमारा नेता, तू हमारा सेनानी है। राजपूत वंश के शिरभूषण, तेरी यह उदाŸा चरित्र देह! ‘यह शय्या पर नहीं, रणभूमि पर ही गिरने के योग्य है।’ स्वराज्य के लिए उतावले वे सैनिक चिल्लाने
थी वही लेकर दानापुर के विद्रोही सिपाही जगदीशपुर आ पहुंचें फिर अब इहरना किसके लिए? तेरी देशमाता की शपथ है, तेरे स्वधर्म की शपथ है, तेरे मानभंग की शपथ है, कुंवर सिंह म्यान फेंक दे और स्वतंत्रता के लिए तलवार खींच! तू हमारा राजा, तू हमारा नेता, तू हमारा सेनानी है। राजपूत वंश के शिरभूषण, तेरी यह उदाŸा चरित्र देह! ‘यह शय्या पर नहीं, रणभूमि पर ही गिरने के योग्य है।’ स्वराज्य के लिए उतावले वे सैनिक चिल्लाने