लगा होगा। कुछ इस कारण और कुछ गढ़ चढ़ाकर गोले बरसाने चालू किए। एक-दो बार गुप्त सुरंग खोदकर परकोटे के नीचे बारूद भी लगाई गई। अंदर के लोगों को थोड़े ही दिनों में पानी की बंूद भी मिलना कठिन हो गया। पर अपने गोरे अन्नदाता के ऐसे हाल होते देखकर सिख लोग चुप बैठनेवाले नामर्द नहीं थे। उन्हांेने चैबीस घंटे मंे उस गढ़ी में से जो लड़ रहे हैं वे केवल यूरोपियन नहीं, उनमें अधिकतर सिख हैं यह बात जब खुली तब विद्रोहियों को
लगा होगा। कुछ इस कारण और कुछ गढ़ चढ़ाकर गोले बरसाने चालू किए। एक-दो बार गुप्त सुरंग खोदकर परकोटे के नीचे बारूद भी लगाई गई। अंदर के लोगों को थोड़े ही दिनों में पानी की बंूद भी मिलना कठिन हो गया। पर अपने गोरे अन्नदाता के ऐसे हाल होते देखकर सिख लोग चुप बैठनेवाले नामर्द नहीं थे। उन्हांेने चैबीस घंटे मंे उस गढ़ी में से जो लड़ रहे हैं वे केवल यूरोपियन नहीं, उनमें अधिकतर सिख हैं यह बात जब खुली तब विद्रोहियों को