1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बहुत खेद हुआ। क्योंकि यह लड़ाई अंग्रेजों के विरूद्ध हिंदुस्थारियों की न होकर गुरू गोविंद सिंह और कुंवर सिंह के बीच हो गई। जो अंगे्रजों की ओर से इतनी विलक्षण शूरता से पर ऐसे नीचे देशद्रोह से लड़ रहे हैं उन सिखों को अपनी तरफ करने के लिए रोज शाम को विद्रोहियों के दूत एक खंभे की आड़ में खड़े हो जोर-जोर से उपदेश करते-‘‘ऐ सिखों! तुम फिरंगियों की ओर से लडत्रकर किस नरक में जाना चाहते हो? जिन्होंने अपना राज डुबाया,


1282 of 2102

बहुत खेद हुआ। क्योंकि यह लड़ाई अंग्रेजों के विरूद्ध हिंदुस्थारियों की न होकर गुरू गोविंद सिंह और कुंवर सिंह के बीच हो गई। जो अंगे्रजों की ओर से इतनी विलक्षण शूरता से पर ऐसे नीचे देशद्रोह से लड़ रहे हैं उन सिखों को अपनी तरफ करने के लिए रोज शाम को विद्रोहियों के दूत एक खंभे की आड़ में खड़े हो जोर-जोर से उपदेश करते-‘‘ऐ सिखों! तुम फिरंगियों की ओर से लडत्रकर किस नरक में जाना चाहते हो? जिन्होंने अपना राज डुबाया,


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