बहुत खेद हुआ। क्योंकि यह लड़ाई अंग्रेजों के विरूद्ध हिंदुस्थारियों की न होकर गुरू गोविंद सिंह और कुंवर सिंह के बीच हो गई। जो अंगे्रजों की ओर से इतनी विलक्षण शूरता से पर ऐसे नीचे देशद्रोह से लड़ रहे हैं उन सिखों को अपनी तरफ करने के लिए रोज शाम को विद्रोहियों के दूत एक खंभे की आड़ में खड़े हो जोर-जोर से उपदेश करते-‘‘ऐ सिखों! तुम फिरंगियों की ओर से लडत्रकर किस नरक में जाना चाहते हो? जिन्होंने अपना राज डुबाया,
बहुत खेद हुआ। क्योंकि यह लड़ाई अंग्रेजों के विरूद्ध हिंदुस्थारियों की न होकर गुरू गोविंद सिंह और कुंवर सिंह के बीच हो गई। जो अंगे्रजों की ओर से इतनी विलक्षण शूरता से पर ऐसे नीचे देशद्रोह से लड़ रहे हैं उन सिखों को अपनी तरफ करने के लिए रोज शाम को विद्रोहियों के दूत एक खंभे की आड़ में खड़े हो जोर-जोर से उपदेश करते-‘‘ऐ सिखों! तुम फिरंगियों की ओर से लडत्रकर किस नरक में जाना चाहते हो? जिन्होंने अपना राज डुबाया,