किए गए निवेदनों के उŸार में वे गोलियां चलाते और यह देखकर शाबाश! शाबाश!! कहते हुए यूरोपियन उनकी पीठ ठोंकते। ऐसी स्थिति में उस घेरे को तीन दिन हो गए। तीसरे दिन अर्थात् जुलाई 29 की रात उस गढ़ी की वह छोटी अंगे्रजी सेना से आनेवाली तोपों की गड़गड़ाहट से उछल पड़ी। आनंद से उनके चेहरे प्रमुदित हो उठे। इन विद्रोहियों का नाश कर यह घेरा तोड़ने अंगे्रजी सेना तो नहीं चली आ रही?
हां, वह अंगे्रजी सेना ही घेरा तोड़ने के
किए गए निवेदनों के उŸार में वे गोलियां चलाते और यह देखकर शाबाश! शाबाश!! कहते हुए यूरोपियन उनकी पीठ ठोंकते। ऐसी स्थिति में उस घेरे को तीन दिन हो गए। तीसरे दिन अर्थात् जुलाई 29 की रात उस गढ़ी की वह छोटी अंगे्रजी सेना से आनेवाली तोपों की गड़गड़ाहट से उछल पड़ी। आनंद से उनके चेहरे प्रमुदित हो उठे। इन विद्रोहियों का नाश कर यह घेरा तोड़ने अंगे्रजी सेना तो नहीं चली आ रही?
हां, वह अंगे्रजी सेना ही घेरा तोड़ने के