फिर भी आरा में अंगे्रजी सेना घिरी हुई है, यह सुनते ह ीवह उधर दौड़ पड़ा। 29 और 30 जुलाई को डनबार की
1857 का स्वातंत्र्य समर - 269
सेना को नेस्तनाबूद कर कुंवर सिंह के सिपाही जो वापस लौटे तो आयर की सेना के उधर आने का समाचार उस वृद्ध सेनानी को मिला। क्षण भर का भी विश्राम न लेकर उसने अपनी सेना इकट्ठी की। मेजर आयर जिधर से आ रहा था उस रास्ते के हर अवरोध का लाभ लेते हुए उसने लड़ाई जारी रखी और अंत में 2 अगस्त
फिर भी आरा में अंगे्रजी सेना घिरी हुई है, यह सुनते ह ीवह उधर दौड़ पड़ा। 29 और 30 जुलाई को डनबार की
1857 का स्वातंत्र्य समर - 269
सेना को नेस्तनाबूद कर कुंवर सिंह के सिपाही जो वापस लौटे तो आयर की सेना के उधर आने का समाचार उस वृद्ध सेनानी को मिला। क्षण भर का भी विश्राम न लेकर उसने अपनी सेना इकट्ठी की। मेजर आयर जिधर से आ रहा था उस रास्ते के हर अवरोध का लाभ लेते हुए उसने लड़ाई जारी रखी और अंत में 2 अगस्त