के प्रधान कारण न होकर केवल निमित्तभूत कारण हैं। जैसे सीता-हरण रामायण का केवल निमित्त है और मुख्य या प्रधान कारण उसके मूल में छिपे तत्त्व ही हैं।
वे तत्त्व कौन से थे? हजारों शूरों की तलवारों को उनकी म्यानों से खींचकर रणांगण में चमचमानेवाले वे तत्त्व कौन से हैं? निस्तेज हुए मुकुटों को सतेज करनेवाले और टूटे पडे़ ध्वजों को फिर से खड़ा करनेवाले वे तत्त्व कौन से थे जिनपर हजारों व्यक्तियों ने अपने उश्ण रक्त
के प्रधान कारण न होकर केवल निमित्तभूत कारण हैं। जैसे सीता-हरण रामायण का केवल निमित्त है और मुख्य या प्रधान कारण उसके मूल में छिपे तत्त्व ही हैं।
वे तत्त्व कौन से थे? हजारों शूरों की तलवारों को उनकी म्यानों से खींचकर रणांगण में चमचमानेवाले वे तत्त्व कौन से हैं? निस्तेज हुए मुकुटों को सतेज करनेवाले और टूटे पडे़ ध्वजों को फिर से खड़ा करनेवाले वे तत्त्व कौन से थे जिनपर हजारों व्यक्तियों ने अपने उश्ण रक्त