आज तक गोरी और काली सेना की नई-नई कुमुक भेजकर जाॅन लाॅरेंस ने वह बोझ यथासंभव संभाला भी था। फिर भी दिल्ली से मांगी गई सीजट्रेन और कुमु की नई मांग का अनादर न करते हुए जाॅन लाॅरेंस ने कोई दो हजार चुनी हुई सेना निकल्सन के नेतृत्व में
1857 का स्वातंत्र्य समर - 273
भेज दी थी। इस सेना के आने का समाचार अंगे्रजी छावनी में फैलते ही सैनिकों की मुद्रा में आनंद, उत्साह और द्वेष का तेज झलकने लगा। उस तेज में दो हजार सैनिक आने का हिस्सा उतना नहीं था,
आज तक गोरी और काली सेना की नई-नई कुमुक भेजकर जाॅन लाॅरेंस ने वह बोझ यथासंभव संभाला भी था। फिर भी दिल्ली से मांगी गई सीजट्रेन और कुमु की नई मांग का अनादर न करते हुए जाॅन लाॅरेंस ने कोई दो हजार चुनी हुई सेना निकल्सन के नेतृत्व में
1857 का स्वातंत्र्य समर - 273
भेज दी थी। इस सेना के आने का समाचार अंगे्रजी छावनी में फैलते ही सैनिकों की मुद्रा में आनंद, उत्साह और द्वेष का तेज झलकने लगा। उस तेज में दो हजार सैनिक आने का हिस्सा उतना नहीं था,