यह असंभव! अब बहुत समय हो गया है, अतः हम आगे तो बढ़ ही लें। ऐसे प्रबल आत्मविश्वास से कैंपबेल ने हमले के आदेश दिए। खंदक तक वे पहुंचे। उन्होंने खंदक में पड़े अपने विजयी मरणोंन्मुखों को देखा और मारते-दौड़ते वे कश्मीरी दरवाजे के टूटे हिस्से से दिल्ली में कूद पड़े। वहीं उन्हंे अपने-अपने काम सफलता से पूरे कर दिल्ली में घुसे हुए वे पहले दो काॅलम भी मिले। निकल्सन के अधीनस्थ ये तीनों
1857 का स्वातंत्र्य समर - 278
यह असंभव! अब बहुत समय हो गया है, अतः हम आगे तो बढ़ ही लें। ऐसे प्रबल आत्मविश्वास से कैंपबेल ने हमले के आदेश दिए। खंदक तक वे पहुंचे। उन्होंने खंदक में पड़े अपने विजयी मरणोंन्मुखों को देखा और मारते-दौड़ते वे कश्मीरी दरवाजे के टूटे हिस्से से दिल्ली में कूद पड़े। वहीं उन्हंे अपने-अपने काम सफलता से पूरे कर दिल्ली में घुसे हुए वे पहले दो काॅलम भी मिले। निकल्सन के अधीनस्थ ये तीनों
1857 का स्वातंत्र्य समर - 278