के वर्श में जितने कारण घटित हुए उतने पहले कुछेक बार ही घटित हुए थे। इन विशिष्ट घटनाओं से हिंद भूमि के शरीर में किंचित् प्रस्फुरण हुआ, इन मनोवृत्तियों को विलक्षण चेतना मिली और स्वधर्म एवं स्वराज्य के लिए लोक-शक्तियां सज्जित होने लगी। दिल्ली के बादशाह द्वारा स्वराज्य-स्थापना के लिए जारी घोषणापत्र में वे कहते हैं और अपने प्राणप्रिय धर्म एवं प्राणप्रिय देश को पूरी तरह भयमुक्त कर सकते हैं।’’
इस वाक्य
के वर्श में जितने कारण घटित हुए उतने पहले कुछेक बार ही घटित हुए थे। इन विशिष्ट घटनाओं से हिंद भूमि के शरीर में किंचित् प्रस्फुरण हुआ, इन मनोवृत्तियों को विलक्षण चेतना मिली और स्वधर्म एवं स्वराज्य के लिए लोक-शक्तियां सज्जित होने लगी। दिल्ली के बादशाह द्वारा स्वराज्य-स्थापना के लिए जारी घोषणापत्र में वे कहते हैं और अपने प्राणप्रिय धर्म एवं प्राणप्रिय देश को पूरी तरह भयमुक्त कर सकते हैं।’’
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