शासन के सारे कार्य बेगम जीनत महल ही चलाती थीं तो लखनऊ के राजमहल में भी वहां का नवाब अल्प वय का होने के कारण वहां का राजप्रतिनिधित्व बेगम हजरत महल की कर्मठता पर ही अवलंबित था। यह अवध की बेगम यद्यपि सन् 1857 की दूसरी लक्ष्मीबाई नहीं थी, फिर भी पराकाष्ठा की कर्तव्यवती, स्वतंत्रता के रस में सराबोर और साहस-सकंल्पा थी, इसमें कोई शंका नहीं। उसके दरबार के मैमूब खान आदि सरदारों के नेताओं को और अवध प्रांत के
शासन के सारे कार्य बेगम जीनत महल ही चलाती थीं तो लखनऊ के राजमहल में भी वहां का नवाब अल्प वय का होने के कारण वहां का राजप्रतिनिधित्व बेगम हजरत महल की कर्मठता पर ही अवलंबित था। यह अवध की बेगम यद्यपि सन् 1857 की दूसरी लक्ष्मीबाई नहीं थी, फिर भी पराकाष्ठा की कर्तव्यवती, स्वतंत्रता के रस में सराबोर और साहस-सकंल्पा थी, इसमें कोई शंका नहीं। उसके दरबार के मैमूब खान आदि सरदारों के नेताओं को और अवध प्रांत के