1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भिन्न-भिन्न स्थानों से लखनऊ की ओर स्वतंत्रता संग्राम के लिए दौड़ते आए कर्मठ लोगों को मान्य भिन्न-भिन्न पुरूषों को बेगम हजरत महल ने न्याय, वसुली, लश्कर, पुलिस आदि विभागों में अधिकारी नियुक्त कर दिया। हर दिन राजनीति के भिन्न-भिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए दरबार भरता और वहां स्वयं बेगम साहिबा अपने अल्प वय नवाब के नाम से राजकाज करती थीं। अवध प्रांत स्वतंत्र होकर अंगे्रजी सŸाा का वहां लवलेश की शेष नहीं है,


1375 of 2102

भिन्न-भिन्न स्थानों से लखनऊ की ओर स्वतंत्रता संग्राम के लिए दौड़ते आए कर्मठ लोगों को मान्य भिन्न-भिन्न पुरूषों को बेगम हजरत महल ने न्याय, वसुली, लश्कर, पुलिस आदि विभागों में अधिकारी नियुक्त कर दिया। हर दिन राजनीति के भिन्न-भिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए दरबार भरता और वहां स्वयं बेगम साहिबा अपने अल्प वय नवाब के नाम से राजकाज करती थीं। अवध प्रांत स्वतंत्र होकर अंगे्रजी सŸाा का वहां लवलेश की शेष नहीं है,


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