लग जाने पर फिर उस नशे में चाहे जिस भी कानून को अपनी इच्छा के अनुसार लतियाने की आदत लग जाती है। दुष्टतापूर्ण कानूनों को नष्ट करने का चस्का लगी तलवार कानून का ही नाश
1857 का स्वातंत्र्य समर - 285
करने लगती है। विदेशी शासन का निःपात करने निकले वीर अंत में शासन का ही नाश करने लगते हैं। विदेशी राज्य के बंधन काट देने के रण-मद में उन्हें राजबंधन ही अस्वीकार हो जाते हैं और इस तरह राज्य क्रांति का अंत अराजकता में,
लग जाने पर फिर उस नशे में चाहे जिस भी कानून को अपनी इच्छा के अनुसार लतियाने की आदत लग जाती है। दुष्टतापूर्ण कानूनों को नष्ट करने का चस्का लगी तलवार कानून का ही नाश
1857 का स्वातंत्र्य समर - 285
करने लगती है। विदेशी शासन का निःपात करने निकले वीर अंत में शासन का ही नाश करने लगते हैं। विदेशी राज्य के बंधन काट देने के रण-मद में उन्हें राजबंधन ही अस्वीकार हो जाते हैं और इस तरह राज्य क्रांति का अंत अराजकता में,