1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सद्गुणों का अंत दुर्गुणों में हो जाता है और हितकर प्रयासों के परिणाम अहितकारी होने लगते हैं। अराजकता-पराजय जितनी ही बंधन-रहितता दुष्ट बंधनों जैसी ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के नाश का कारण होनेवाली होती है-इस समाज-सत्य का विस्मरण जिस किसी क्रांति में हुआ उस क्रांति का उसके क्रांति तŸव कारण ही विनाश हुआ है। किसी रोग का परिहार करने के लिए मद्य सेवन की आदत जैसे जाती नहीं, वैसे ही दुष्टतापूर्ण बंधन से


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सद्गुणों का अंत दुर्गुणों में हो जाता है और हितकर प्रयासों के परिणाम अहितकारी होने लगते हैं। अराजकता-पराजय जितनी ही बंधन-रहितता दुष्ट बंधनों जैसी ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के नाश का कारण होनेवाली होती है-इस समाज-सत्य का विस्मरण जिस किसी क्रांति में हुआ उस क्रांति का उसके क्रांति तŸव कारण ही विनाश हुआ है। किसी रोग का परिहार करने के लिए मद्य सेवन की आदत जैसे जाती नहीं, वैसे ही दुष्टतापूर्ण बंधन से


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