जाना चाहिए। सारांश यह कि बाहर विदेशियों का तख्ता पलटना, परंतु अंदर निर्माण करना; बाहर तलवार, पर अंदर विधि-कानून
राज्य क्रांति की सफलता और सिद्धि के लिए अति आवश्यक राज्य व्यवस्था के उपर्युक्त सिद्धांत का सन् 1857 के पूर्वार्ध में बहुत अच्छी तरह पालन किया गया। विद्रोह होते ही यथासंभव वेग से दिल्ल्ी, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों में व्यवस्था से राजय प्रबंध के कर्तव्य करने की ओर ध्यान दिया गया। व्यक्ति विषयक
जाना चाहिए। सारांश यह कि बाहर विदेशियों का तख्ता पलटना, परंतु अंदर निर्माण करना; बाहर तलवार, पर अंदर विधि-कानून
राज्य क्रांति की सफलता और सिद्धि के लिए अति आवश्यक राज्य व्यवस्था के उपर्युक्त सिद्धांत का सन् 1857 के पूर्वार्ध में बहुत अच्छी तरह पालन किया गया। विद्रोह होते ही यथासंभव वेग से दिल्ल्ी, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों में व्यवस्था से राजय प्रबंध के कर्तव्य करने की ओर ध्यान दिया गया। व्यक्ति विषयक