1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बिगड़ गया। इस कारण स्वराज्य चेतना की पहली पवित्र लहर में स्वयं ही नियुक्त किए अधिकारियों के सामने वे स्वयं अपमान, अवज्ञा और उपहास भी करने लगे तथा राज्य क्रांति का अंत अराजकता में होने लगा। ऐसी स्थिति में उनके स्वार्थ से दूषित हुई सिद्धांतनिष्ठा को अपने वयक्तिनिष्ठा के ऐश्वर्य के शुद्ध करके अपने पराक्रम के दिव्यत्व से उनका मनोहरण करके जो उन्हें फिर से स्वराज्य व्यवस्था के अनुशासन पर ला बैठाए, ऐसे विलक्षण


1386 of 2102

बिगड़ गया। इस कारण स्वराज्य चेतना की पहली पवित्र लहर में स्वयं ही नियुक्त किए अधिकारियों के सामने वे स्वयं अपमान, अवज्ञा और उपहास भी करने लगे तथा राज्य क्रांति का अंत अराजकता में होने लगा। ऐसी स्थिति में उनके स्वार्थ से दूषित हुई सिद्धांतनिष्ठा को अपने वयक्तिनिष्ठा के ऐश्वर्य के शुद्ध करके अपने पराक्रम के दिव्यत्व से उनका मनोहरण करके जो उन्हें फिर से स्वराज्य व्यवस्था के अनुशासन पर ला बैठाए, ऐसे विलक्षण


1386 of 2102