1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

वर्ग की अपेक्षा पहले वर्ग अर्थात् फालतू लोगों की ही भरती अधिक होने से बेगम हजरत महल के दरबार से नियुक्त भिन्न-भिन्न अधिकारियों के आदेश कभी भी नहीं माने जाते थे और सिपाही लोग बेमुरव्वत, अत्याचारी, अनुशासनहीन और स्वंच्छंद व्यवहार करते थे। इस पहले वर्ग की संख्या यद्यपि बड़ी थी फिर भी दूसरे वर्ग के जो थोड़े लोग उनमें थे उनके शूरत्व और उदाŸा विचारों के प्राकृतिक तेज से उन्हीं का प्रभाव सिपाहियों पर अधिक होता


1388 of 2102

वर्ग की अपेक्षा पहले वर्ग अर्थात् फालतू लोगों की ही भरती अधिक होने से बेगम हजरत महल के दरबार से नियुक्त भिन्न-भिन्न अधिकारियों के आदेश कभी भी नहीं माने जाते थे और सिपाही लोग बेमुरव्वत, अत्याचारी, अनुशासनहीन और स्वंच्छंद व्यवहार करते थे। इस पहले वर्ग की संख्या यद्यपि बड़ी थी फिर भी दूसरे वर्ग के जो थोड़े लोग उनमें थे उनके शूरत्व और उदाŸा विचारों के प्राकृतिक तेज से उन्हीं का प्रभाव सिपाहियों पर अधिक होता


1388 of 2102