1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

आगे बढ़ो’ का आह्यन करता वह खंदक लांघकर अंगे्रजी तोप पर अपना क्रांतिध्वज गाड़ने लगा। परंतु इस विलक्षण साहसी पुरूष को अंगे्रजों की गोली ने तत्काल चित कर दिया। ऐसे समय उस एक शव के पीछे हजारों को आग बढ़ाना छोड़कर और जिस हेतु वह धर्मवीर गिरा उस रिपु रक्त-भाजन की मृत्यु को सार्थक न करते हुए उसे मरता देख विद्रोही आगे बढ़ने की बजाय पीछे हटने लगे। फिर भी, शाबाश सीढ़ीवाले! इन बाजारू लोगों की तरह पीछे न भागते हुए तुम


1391 of 2102

आगे बढ़ो’ का आह्यन करता वह खंदक लांघकर अंगे्रजी तोप पर अपना क्रांतिध्वज गाड़ने लगा। परंतु इस विलक्षण साहसी पुरूष को अंगे्रजों की गोली ने तत्काल चित कर दिया। ऐसे समय उस एक शव के पीछे हजारों को आग बढ़ाना छोड़कर और जिस हेतु वह धर्मवीर गिरा उस रिपु रक्त-भाजन की मृत्यु को सार्थक न करते हुए उसे मरता देख विद्रोही आगे बढ़ने की बजाय पीछे हटने लगे। फिर भी, शाबाश सीढ़ीवाले! इन बाजारू लोगों की तरह पीछे न भागते हुए तुम


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