1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के सेना अंगे्रजों पर टूट पड़ी। उस सेना के जिस भाग ने कानपुर बैटरी पर हमला किया


1857 का स्वातंत्र्य समर - 287

था उसके सैनिकों ने अंगे्रजी तोपों पर निडर होकर हमला किया। ‘चलो बहादुर, चलो! चलो बहादुर, चलो!’ ऐसी गर्जना करते वे फिर-फिर उन तोपों पर चढ़ जाते। जिनके हाथों में उनका स्वराज्य ध्वज फहरा रहा था उनके वीर्यवर नायक ने स्वयं वह झंडा ऊंचा उठाकर दौड़ते हुए उस तोपखाने की खंदक में छलांग लगा दी और दूसरों को-‘चलो,


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के सेना अंगे्रजों पर टूट पड़ी। उस सेना के जिस भाग ने कानपुर बैटरी पर हमला किया


1857 का स्वातंत्र्य समर - 287

था उसके सैनिकों ने अंगे्रजी तोपों पर निडर होकर हमला किया। ‘चलो बहादुर, चलो! चलो बहादुर, चलो!’ ऐसी गर्जना करते वे फिर-फिर उन तोपों पर चढ़ जाते। जिनके हाथों में उनका स्वराज्य ध्वज फहरा रहा था उनके वीर्यवर नायक ने स्वयं वह झंडा ऊंचा उठाकर दौड़ते हुए उस तोपखाने की खंदक में छलांग लगा दी और दूसरों को-‘चलो,


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