1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

कोई समाचार लाना किसी भी गोरे दूत को संभव नहीं था। उनकी गोरी चमड़ी, भूरे बाल या उनकी कंजी आंखे उन्हें सिपाही की तलवार से जीवित वापस नहीं जाने देते थे। इसलिए इस आंग्ल दूत कर्म पर किसी काले आदमी की नियुक्ति आवश्यक होने से बहुत से राजनिष्ठ काले लोग अंगे्रजों ने अब तक लखनऊ के बाहरी प्रदेश में भेजे थे। परंतु उन सबमें से अकेला अंगद ही जीवित लौट आया। विद्रोहियों के डर से वह कोई चिट्ठी-पत्री साथ नहीं लाया था,


1401 of 2102

कोई समाचार लाना किसी भी गोरे दूत को संभव नहीं था। उनकी गोरी चमड़ी, भूरे बाल या उनकी कंजी आंखे उन्हें सिपाही की तलवार से जीवित वापस नहीं जाने देते थे। इसलिए इस आंग्ल दूत कर्म पर किसी काले आदमी की नियुक्ति आवश्यक होने से बहुत से राजनिष्ठ काले लोग अंगे्रजों ने अब तक लखनऊ के बाहरी प्रदेश में भेजे थे। परंतु उन सबमें से अकेला अंगद ही जीवित लौट आया। विद्रोहियों के डर से वह कोई चिट्ठी-पत्री साथ नहीं लाया था,


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