फिर भी ‘अंगे्रजी सेना कानपुर से लखनऊ की सहायता के लिए
1857 का स्वातंत्र्य समर - 289
निकली है’-यह प्रत्यक्ष देखा हुआ समाचार उसने कमांडर इंग्लिस को सुनाया। इस समाचार से आनंदित हुए अंगे्रजों ने अंगद से कहा, ‘‘तू फिर से लौट जा और हैवलाॅक का लिखित उŸार लेकर आ।’’ तारीख 22 को लखनऊ छोड़क रवह अंगद 25 की रात ग्यारह बजे फिर लौट आया। उसके साथ हैवलाॅक का पत्र था-‘‘किसी भी कठिनाई से निपटने के लिए आवश्यक सबल सेना के साथ हैवलाॅक आ रहा है,
फिर भी ‘अंगे्रजी सेना कानपुर से लखनऊ की सहायता के लिए
1857 का स्वातंत्र्य समर - 289
निकली है’-यह प्रत्यक्ष देखा हुआ समाचार उसने कमांडर इंग्लिस को सुनाया। इस समाचार से आनंदित हुए अंगे्रजों ने अंगद से कहा, ‘‘तू फिर से लौट जा और हैवलाॅक का लिखित उŸार लेकर आ।’’ तारीख 22 को लखनऊ छोड़क रवह अंगद 25 की रात ग्यारह बजे फिर लौट आया। उसके साथ हैवलाॅक का पत्र था-‘‘किसी भी कठिनाई से निपटने के लिए आवश्यक सबल सेना के साथ हैवलाॅक आ रहा है,