पांच-छह दिन में लखनऊ मुक्त हो जाएगा।’’ अपनी मुक्ति के लिए आनेवाले उस शूर हैवलाॅक को लखनऊ की पूरी जानकारी मिले, इसलिए लश्करी नक्शे हाथ में देकर अंगे्रजों ने अंगद को कहा, ‘‘तू फिर से हैवलाॅक के पास जा।’’ वह विलक्षण दूत फिर से हैवलाॅक के पास गया और उसने सारे लश्करी नक्शे उसे दिए। अब हैवलाॅक् की विजयी सेना के ध्वज लखनऊ के श्मशान पर से आते ही होंगे। अंगे्रज उन्हें लगा, ये हैवलाॅक की तोपें तो नहीं!
इस
पांच-छह दिन में लखनऊ मुक्त हो जाएगा।’’ अपनी मुक्ति के लिए आनेवाले उस शूर हैवलाॅक को लखनऊ की पूरी जानकारी मिले, इसलिए लश्करी नक्शे हाथ में देकर अंगे्रजों ने अंगद को कहा, ‘‘तू फिर से हैवलाॅक के पास जा।’’ वह विलक्षण दूत फिर से हैवलाॅक के पास गया और उसने सारे लश्करी नक्शे उसे दिए। अब हैवलाॅक् की विजयी सेना के ध्वज लखनऊ के श्मशान पर से आते ही होंगे। अंगे्रज उन्हें लगा, ये हैवलाॅक की तोपें तो नहीं!
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