की दीवार में ऐसा रास्ता बनाया होता तो उन्होंने आधे घंटे मंे उस रेसीडेंसी को खंडहर बना दिया होता। दोपहर दो बजे तक विद्रोहियों में ऐसी शूरता और देशभक्ति के पक्ष में भीरूता हो, यह कितना बड़ा दुर्भाग्य! दौड़ो, कोई तो आगे बढ़ो, इस दुर्भाग्य का कंठच्छेद करने दौड़ों दिन के पांच बजे हैं और आक्रमण लगभग विफल हो गया है। तथापि तत्कालीन विजय के लिए नही ंतो भी सर्वकालीन सफलता के लिए दौड़ो, कोई तो दौड़ो! कैप्टन सांडर्स-अब
की दीवार में ऐसा रास्ता बनाया होता तो उन्होंने आधे घंटे मंे उस रेसीडेंसी को खंडहर बना दिया होता। दोपहर दो बजे तक विद्रोहियों में ऐसी शूरता और देशभक्ति के पक्ष में भीरूता हो, यह कितना बड़ा दुर्भाग्य! दौड़ो, कोई तो आगे बढ़ो, इस दुर्भाग्य का कंठच्छेद करने दौड़ों दिन के पांच बजे हैं और आक्रमण लगभग विफल हो गया है। तथापि तत्कालीन विजय के लिए नही ंतो भी सर्वकालीन सफलता के लिए दौड़ो, कोई तो दौड़ो! कैप्टन सांडर्स-अब