के ऊपर से मार करनेवाली अंगे्रजी बैनेट को दबाकर छीन लिया। वाह रे वीर! अंत में शत्रु की गोली से गिर गया! स्वदेश की जितनी बच सके उतनी लाज बचाने को समरांगण में शत्रु पक्ष भी दांतों तले अंगुली दबाए, ऐसी शूरता दिखाकर शहादत के रक्त-तीर्थ में रक्त-समाधि ले गया। वह गिरा, दूसरा गिरा तीसरा भी गिरा, जोरदार लड़ाई हुई। बैनटों को अपने हाथों से झपटकर छीन लेनेवाले
1857 का स्वातंत्र्य समर - 290
और मृत्यु तक बेसुध
के ऊपर से मार करनेवाली अंगे्रजी बैनेट को दबाकर छीन लिया। वाह रे वीर! अंत में शत्रु की गोली से गिर गया! स्वदेश की जितनी बच सके उतनी लाज बचाने को समरांगण में शत्रु पक्ष भी दांतों तले अंगुली दबाए, ऐसी शूरता दिखाकर शहादत के रक्त-तीर्थ में रक्त-समाधि ले गया। वह गिरा, दूसरा गिरा तीसरा भी गिरा, जोरदार लड़ाई हुई। बैनटों को अपने हाथों से झपटकर छीन लेनेवाले
1857 का स्वातंत्र्य समर - 290
और मृत्यु तक बेसुध