1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के ऊपर से मार करनेवाली अंगे्रजी बैनेट को दबाकर छीन लिया। वाह रे वीर! अंत में शत्रु की गोली से गिर गया! स्वदेश की जितनी बच सके उतनी लाज बचाने को समरांगण में शत्रु पक्ष भी दांतों तले अंगुली दबाए, ऐसी शूरता दिखाकर शहादत के रक्त-तीर्थ में रक्त-समाधि ले गया। वह गिरा, दूसरा गिरा तीसरा भी गिरा, जोरदार लड़ाई हुई। बैनटों को अपने हाथों से झपटकर छीन लेनेवाले


1857 का स्वातंत्र्य समर - 290

और मृत्यु तक बेसुध


1407 of 2102

के ऊपर से मार करनेवाली अंगे्रजी बैनेट को दबाकर छीन लिया। वाह रे वीर! अंत में शत्रु की गोली से गिर गया! स्वदेश की जितनी बच सके उतनी लाज बचाने को समरांगण में शत्रु पक्ष भी दांतों तले अंगुली दबाए, ऐसी शूरता दिखाकर शहादत के रक्त-तीर्थ में रक्त-समाधि ले गया। वह गिरा, दूसरा गिरा तीसरा भी गिरा, जोरदार लड़ाई हुई। बैनटों को अपने हाथों से झपटकर छीन लेनेवाले


1857 का स्वातंत्र्य समर - 290

और मृत्यु तक बेसुध


1407 of 2102