भासित नहीं होगी उसे या तो मंदबुद्धि या दुर्बुदि होना चाहिए। ईष्वर-प्रदत्त अधिकारों के लिए लड़ना मनुष्यमात्र का कर्तव्य है और स्वधर्म एवं स्वराज्य के लिए लड़ने को ही उस मय के भारतीय शूरों ने अपने शस्त्र निकाले थे, यह सिद्ध करने के लिए इससे सबल साक्ष्य और क्या दिया जा सकता है! भिन्न-भिन्न स्थानों और भिन्न-भिन्न कालों में निकाले गए ये घोषणापत्र इस क्रांतियुद्ध की मीमांसा करने के लिए एक अक्षर भी और अधिक
भासित नहीं होगी उसे या तो मंदबुद्धि या दुर्बुदि होना चाहिए। ईष्वर-प्रदत्त अधिकारों के लिए लड़ना मनुष्यमात्र का कर्तव्य है और स्वधर्म एवं स्वराज्य के लिए लड़ने को ही उस मय के भारतीय शूरों ने अपने शस्त्र निकाले थे, यह सिद्ध करने के लिए इससे सबल साक्ष्य और क्या दिया जा सकता है! भिन्न-भिन्न स्थानों और भिन्न-भिन्न कालों में निकाले गए ये घोषणापत्र इस क्रांतियुद्ध की मीमांसा करने के लिए एक अक्षर भी और अधिक