लिखने की आवश्यकता शेष नहीं रहने देते। ये घोषणापत्र ऐरे-गैरे द्वारा निकाले हुए नहीं हैं। इस युद्ध में जो भी शमशीर निकालते हैं वे सब समान योग्यता के हैं। धर्मयुद्ध में उठी यह गर्जना ‘स्वधर्म एवं स्वराज्य’ दोनों तत्त्वों का उच्चारण एवं जयघोष करती है।
पर क्या ये दोनों ही तत्त्व (स्वराज्य-स्वधर्म) परस्पर विरूद्ध या भिन्न समझे जाते थे? स्वधर्म एवं स्वराज्य का एक-दूसरे से किसी भी अर्थ में संबंध नहीं है,
लिखने की आवश्यकता शेष नहीं रहने देते। ये घोषणापत्र ऐरे-गैरे द्वारा निकाले हुए नहीं हैं। इस युद्ध में जो भी शमशीर निकालते हैं वे सब समान योग्यता के हैं। धर्मयुद्ध में उठी यह गर्जना ‘स्वधर्म एवं स्वराज्य’ दोनों तत्त्वों का उच्चारण एवं जयघोष करती है।
पर क्या ये दोनों ही तत्त्व (स्वराज्य-स्वधर्म) परस्पर विरूद्ध या भिन्न समझे जाते थे? स्वधर्म एवं स्वराज्य का एक-दूसरे से किसी भी अर्थ में संबंध नहीं है,