कहता है-‘‘कम-से-कम अवध के लोगों के प्रयासों को तो स्वातंन्न्य समर का ही स्वरूप प्राप्त हो गया था।’’ हैवलाॅक के चारों ओर विद्रोहियो की सेना के क्षितिज जैसे दांव-पेज चल रहे थे। ज्यों-ज्यों कोई आगे जाए, क्षितिज पीछे और पीछे हटता जाता है; पर वह पीछे हट गया, यह मानकर कोई अपनी जगह लौटे तो क्षितिज भी अपनी जगह लौटता दिखाई देता है। हैवलाॅक के मंगलबड़ से पीछे हटते ही विद्रोही बशीरगंज में आ जाते। 11 अगस्त को तीसरी
कहता है-‘‘कम-से-कम अवध के लोगों के प्रयासों को तो स्वातंन्न्य समर का ही स्वरूप प्राप्त हो गया था।’’ हैवलाॅक के चारों ओर विद्रोहियो की सेना के क्षितिज जैसे दांव-पेज चल रहे थे। ज्यों-ज्यों कोई आगे जाए, क्षितिज पीछे और पीछे हटता जाता है; पर वह पीछे हट गया, यह मानकर कोई अपनी जगह लौटे तो क्षितिज भी अपनी जगह लौटता दिखाई देता है। हैवलाॅक के मंगलबड़ से पीछे हटते ही विद्रोही बशीरगंज में आ जाते। 11 अगस्त को तीसरी