5 अगस्त् को पीछे हटकर फिर से मंगलबड़ लौटा-यह सुनते ही विद्रोही फिर से बशीरगंज को कब्जे में लेकर बैठ गए। विद्रोहियों की इस सेना में अधिकतर सभ्य जमींदार लोग ही थे। ‘‘कल की लड़ाई में मरे अधिकतर जमींदार ही थे।’’ अपनी स्वतंत्रता और अपने स्वराज्य के लिए मुलायम बिस्तर को छोड़कर इन
1857 का स्वातंत्र्य समर - 292
जमींदारों ने कंटकाकीर्ण रणक्षेत्र का आश्रय लिया था। उनके इस साहस को देख अंगे्रजी इतिहासकार इन्नेस
5 अगस्त् को पीछे हटकर फिर से मंगलबड़ लौटा-यह सुनते ही विद्रोही फिर से बशीरगंज को कब्जे में लेकर बैठ गए। विद्रोहियों की इस सेना में अधिकतर सभ्य जमींदार लोग ही थे। ‘‘कल की लड़ाई में मरे अधिकतर जमींदार ही थे।’’ अपनी स्वतंत्रता और अपने स्वराज्य के लिए मुलायम बिस्तर को छोड़कर इन
1857 का स्वातंत्र्य समर - 292
जमींदारों ने कंटकाकीर्ण रणक्षेत्र का आश्रय लिया था। उनके इस साहस को देख अंगे्रजी इतिहासकार इन्नेस