1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पार भगाकर धारातीर्थ में रक्त समाधि लिये विश्वसनीय जमींदारो, तुमने स्वदेश की जमीन की अच्छी जमींदारी की। इन्नेस लिखता है-‘‘इस पीछे लौटने का निश्चित परिणाम दिखा। अवध से फिरंगी शासन समाप्त होने की यह अंगे्रजों की दी हुई स्वीकृति है-ऐसा कहते हुए वहां के तालुकेदारों ने लखनऊ दरबार की प्रस्थापित राज्यसŸाा का अधिकार मान्य किया। उनके आदेश वे मानने लगे। आज तक की निरंकुशता समाप्त होने लगी और लखनऊ की मांग के अनुसार


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पार भगाकर धारातीर्थ में रक्त समाधि लिये विश्वसनीय जमींदारो, तुमने स्वदेश की जमीन की अच्छी जमींदारी की। इन्नेस लिखता है-‘‘इस पीछे लौटने का निश्चित परिणाम दिखा। अवध से फिरंगी शासन समाप्त होने की यह अंगे्रजों की दी हुई स्वीकृति है-ऐसा कहते हुए वहां के तालुकेदारों ने लखनऊ दरबार की प्रस्थापित राज्यसŸाा का अधिकार मान्य किया। उनके आदेश वे मानने लगे। आज तक की निरंकुशता समाप्त होने लगी और लखनऊ की मांग के अनुसार


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