1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की रग-रग में समाए राष्ट्र-कर्तव्य का अत्युŸाम द्योतक हैं गुस्से से उबलते हुए भी हैवलाॅक कहता है-‘लोकहित में कोई बाधा न पहुंचती तो मैंने अपने अपमान का प्रतिशोध तत्काल लिया होता।’ नील तथा हैवलाॅक-दोनों रणपटु योद्धाओं ने ऐन संकट के समय उत्पन्न हुए आपसी झगड़े से शत्रु के ध्यान में आ जाए या उसे लाभ मिले, ऐसी एक भी घटिया कृति नहीं की। इतना ही नहीं अपितु लश्करी संबंधों के अनुसार पूरे अनुशासन में रहर एक-दूसरे


1426 of 2102

की रग-रग में समाए राष्ट्र-कर्तव्य का अत्युŸाम द्योतक हैं गुस्से से उबलते हुए भी हैवलाॅक कहता है-‘लोकहित में कोई बाधा न पहुंचती तो मैंने अपने अपमान का प्रतिशोध तत्काल लिया होता।’ नील तथा हैवलाॅक-दोनों रणपटु योद्धाओं ने ऐन संकट के समय उत्पन्न हुए आपसी झगड़े से शत्रु के ध्यान में आ जाए या उसे लाभ मिले, ऐसी एक भी घटिया कृति नहीं की। इतना ही नहीं अपितु लश्करी संबंधों के अनुसार पूरे अनुशासन में रहर एक-दूसरे


1426 of 2102