1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उसकी सेना यमुना के तट पर कालपी में भी तैयार है। इस तरह कालपी में दबाव, ब्रह्यवर्त से दबाव, अवध से दबाव, गंगा के इस तीर पर दबाव, उस तीर पर दबाव, ऐसा चारों ओर से दबा हुआ वह ‘विजयी’ हैवलाॅक कलकŸाा को लिखता है-‘‘भयानक पेच पड़ा हुआ है। नई कुमुक नहीं आई तो कानपुर छोड़कर इलाहाबाद तक पीछे लौटने की बारी अंगे्रजी सेना को जल्द ही आए बिना नहीं रहेगी।’’ इस पत्र के उŸार में नई कुमुक भेजी जाएगी और फिर आज तक सही हुई जय-पराजय की भरपाई लखनऊ का रक्त पीकर कर डालेंगे,


1430 of 2102

उसकी सेना यमुना के तट पर कालपी में भी तैयार है। इस तरह कालपी में दबाव, ब्रह्यवर्त से दबाव, अवध से दबाव, गंगा के इस तीर पर दबाव, उस तीर पर दबाव, ऐसा चारों ओर से दबा हुआ वह ‘विजयी’ हैवलाॅक कलकŸाा को लिखता है-‘‘भयानक पेच पड़ा हुआ है। नई कुमुक नहीं आई तो कानपुर छोड़कर इलाहाबाद तक पीछे लौटने की बारी अंगे्रजी सेना को जल्द ही आए बिना नहीं रहेगी।’’ इस पत्र के उŸार में नई कुमुक भेजी जाएगी और फिर आज तक सही हुई जय-पराजय की भरपाई लखनऊ का रक्त पीकर कर डालेंगे,


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