दी। इस तरह पीछे और आगे से अंगे्रजी सेना को विद्रोहियों ने मारा। अंग्रेजी कमांडर की समझ में भी यह आया कि दिन-ब-दिन विद्रोहियों का समर साहस बढ़ता ही जा रहा है। ब्रह्यवर्त की लड़ाई में इस सारे पराक्रम के बाद भी पराजय लेकर पीछे हटना पड़ा। 17 अगस्त को विद्रोहियों को पराजित कर हैवलाॅक पीछे कानपुर लौटा तो उसे यह ध्यान में आया कि नाना ने पूरी सेना ब्रह्यवर्त में नहीं रखी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 294
और
दी। इस तरह पीछे और आगे से अंगे्रजी सेना को विद्रोहियों ने मारा। अंग्रेजी कमांडर की समझ में भी यह आया कि दिन-ब-दिन विद्रोहियों का समर साहस बढ़ता ही जा रहा है। ब्रह्यवर्त की लड़ाई में इस सारे पराक्रम के बाद भी पराजय लेकर पीछे हटना पड़ा। 17 अगस्त को विद्रोहियों को पराजित कर हैवलाॅक पीछे कानपुर लौटा तो उसे यह ध्यान में आया कि नाना ने पूरी सेना ब्रह्यवर्त में नहीं रखी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 294
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