ही इसलिए हैवलाॅक को बहुत बुरा लगा। जिस वैभव के लिए उसने जी-जान से परिश्रम किया था उस लखनऊ मुक्ति का वैभव ऐन समय पर दूसरे के हाथ पड़ेगा, इस अपमान से उसे बहुत उदासी हुई। फिर भी मैलसन लिखता है-‘‘मनोभंग से उपजे उद्वेग ने मन को कितना ही निराश किया, तो भी कर्तव्य-निर्वाह में अणु मात्र भी कसर न करने का गुण अंग्रेजी राष्ट्र का भूषण है। अंगे्रजी मन के सारे विकार कर्तव्य बुद्धि के अधीन होते हैं। अन्याय-उपेक्षा
ही इसलिए हैवलाॅक को बहुत बुरा लगा। जिस वैभव के लिए उसने जी-जान से परिश्रम किया था उस लखनऊ मुक्ति का वैभव ऐन समय पर दूसरे के हाथ पड़ेगा, इस अपमान से उसे बहुत उदासी हुई। फिर भी मैलसन लिखता है-‘‘मनोभंग से उपजे उद्वेग ने मन को कितना ही निराश किया, तो भी कर्तव्य-निर्वाह में अणु मात्र भी कसर न करने का गुण अंग्रेजी राष्ट्र का भूषण है। अंगे्रजी मन के सारे विकार कर्तव्य बुद्धि के अधीन होते हैं। अन्याय-उपेक्षा