1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar




1857 का स्वातंत्र्य समर - 40

नामक ऐहिक सामथ्र्य की तलवार स्वधर्म नामक पारलौकिक साध्य के लिए हमेशा बाहर निकली रहनी चाहिए। यह प्राचीन जनों के मन का रूझान इतिहास में पग-पग पर दिखेगा। प्राचीन काल में हुई क्रांतियों को धार्मिक स्वरूप क्यों मिलता है, या यह कहें कि धार्मिक पवित्रता के या धर्म-संलग्नता के सिवाय प्रचंड क्रांति का होना-यह बात प्राचीन इतिहास में बिल्कुल भी क्यों ज्ञात नहीं है, इसका बीज भी


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1857 का स्वातंत्र्य समर - 40

नामक ऐहिक सामथ्र्य की तलवार स्वधर्म नामक पारलौकिक साध्य के लिए हमेशा बाहर निकली रहनी चाहिए। यह प्राचीन जनों के मन का रूझान इतिहास में पग-पग पर दिखेगा। प्राचीन काल में हुई क्रांतियों को धार्मिक स्वरूप क्यों मिलता है, या यह कहें कि धार्मिक पवित्रता के या धर्म-संलग्नता के सिवाय प्रचंड क्रांति का होना-यह बात प्राचीन इतिहास में बिल्कुल भी क्यों ज्ञात नहीं है, इसका बीज भी


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