1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सेना विद्रोहियों की अधिकारिक मार मंे आती जा रही थी, फिर भी नील आगे चला। खास बाजार के जंगी फाटक मंे घुसते ही उसके ध्यान में आया कि अंगे्रजी तोपें थोड़ी पीछे रह गई हैं। अतः घोड़े को रोककर वह आंग्ल वीर गरदन घुमाकर पीछे देखने लगा। यही अवसर! यही अवसर! स्वदेश का बदला लेने का यही अवसर। फाटक पर चढ़े कृतांत, तेरे प्राण चले जाएं कोई बात नहीं, पर अवसर पकड़ना ही चाहिए। पल-विपल का अवकाश केवल और फाटक पर बैठे एक सिपाही


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सेना विद्रोहियों की अधिकारिक मार मंे आती जा रही थी, फिर भी नील आगे चला। खास बाजार के जंगी फाटक मंे घुसते ही उसके ध्यान में आया कि अंगे्रजी तोपें थोड़ी पीछे रह गई हैं। अतः घोड़े को रोककर वह आंग्ल वीर गरदन घुमाकर पीछे देखने लगा। यही अवसर! यही अवसर! स्वदेश का बदला लेने का यही अवसर। फाटक पर चढ़े कृतांत, तेरे प्राण चले जाएं कोई बात नहीं, पर अवसर पकड़ना ही चाहिए। पल-विपल का अवकाश केवल और फाटक पर बैठे एक सिपाही


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