लड़ाई आगे बढ़ती। संध्या हो गई तो उसकी भयंकर गति में असंख्य ठोकरें लगने लगीं-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 297
इसलिए आउट्रम कहता है-आज की रात यहीं बिताएं। पर नहीं, नहीं। रूकने का नाम भी निकालना उस शूर हैवलाॅक को कैसे पसंद आएगा? उधर रेसीडेंसी में महीनों से मृत्यु की कराल दाढ़ में दबोचे पड़े उनके देश बंधुओं को और एक रात माने एक युग जैसी है। इसलिए हैवलाॅक आगे बढ़ा। नील आगे बढ़ा। पूर्व का रास्ता भूलकर अंगे्रजी
लड़ाई आगे बढ़ती। संध्या हो गई तो उसकी भयंकर गति में असंख्य ठोकरें लगने लगीं-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 297
इसलिए आउट्रम कहता है-आज की रात यहीं बिताएं। पर नहीं, नहीं। रूकने का नाम भी निकालना उस शूर हैवलाॅक को कैसे पसंद आएगा? उधर रेसीडेंसी में महीनों से मृत्यु की कराल दाढ़ में दबोचे पड़े उनके देश बंधुओं को और एक रात माने एक युग जैसी है। इसलिए हैवलाॅक आगे बढ़ा। नील आगे बढ़ा। पूर्व का रास्ता भूलकर अंगे्रजी