सर कोलिन कैंपबेल कलकŸाा आ पहुंचा था। उस तारीख से 27 अक्तूबर तक वह आंग्ल सेनापति हिंदुस्थान देश को विद्रोहियों के हाथों से फिर जीत लेने को शीघ्र ही शुरू होनेवाली मुहिम की जंगी तैयारी कर रहा था। मद्रास, सीलोन और चीन जानेवाली अंगे्रजी सेना जैसे-जैसे कलकŸाा में उतरने लगी वैसे-वैसे उसका यथोचित विभाजन करने, कासिम बाजार की शस्त्राशाला में नई तोपें ढालने और शस्त्रास्त्र, रसद, रण वस्त्र, सैन्य वाहन आदि की सब
सर कोलिन कैंपबेल कलकŸाा आ पहुंचा था। उस तारीख से 27 अक्तूबर तक वह आंग्ल सेनापति हिंदुस्थान देश को विद्रोहियों के हाथों से फिर जीत लेने को शीघ्र ही शुरू होनेवाली मुहिम की जंगी तैयारी कर रहा था। मद्रास, सीलोन और चीन जानेवाली अंगे्रजी सेना जैसे-जैसे कलकŸाा में उतरने लगी वैसे-वैसे उसका यथोचित विभाजन करने, कासिम बाजार की शस्त्राशाला में नई तोपें ढालने और शस्त्रास्त्र, रसद, रण वस्त्र, सैन्य वाहन आदि की सब