इसका मार्मिक वर्णन करने के बाद ऐसी चेतावनी दी गई है कि इस तरह धर्म-रक्षण के साधन गंवाने पर तुम परमेश्वर के दरबार में अपराधी और धर्मद्रोही माने जाओगे।
ं ं ं ं स्वधर्म के लिए उठो और स्वराज्य प्राप्त करो’-इस तत्त्व ने हिंदुस्थान के इतिहास में कितने दैवी चमत्कार किए हैं? श्री समर्थ रामदास न महाराष्ट्र को ढाई सौ वर्ष पहले यही दीक्षा दी थी-’’धर्मासाठी मरावें, मरोनि अवघ्यांसि मारावें। मारिता मारिता घ्यावे, राज्य आपुलें।’’
इसका मार्मिक वर्णन करने के बाद ऐसी चेतावनी दी गई है कि इस तरह धर्म-रक्षण के साधन गंवाने पर तुम परमेश्वर के दरबार में अपराधी और धर्मद्रोही माने जाओगे।
ं ं ं ं स्वधर्म के लिए उठो और स्वराज्य प्राप्त करो’-इस तत्त्व ने हिंदुस्थान के इतिहास में कितने दैवी चमत्कार किए हैं? श्री समर्थ रामदास न महाराष्ट्र को ढाई सौ वर्ष पहले यही दीक्षा दी थी-’’धर्मासाठी मरावें, मरोनि अवघ्यांसि मारावें। मारिता मारिता घ्यावे, राज्य आपुलें।’’