1857 का स्वातंत्र्य समर - 41
धर्म हेतु मरें, मरते हुए सारों को मारें;
मारते-मारते जीतें, राज्य अपना।
सन् 1857 के क्रांतियुद्ध का यही तात्त्विक कारण है। इस क्रांतियुद्ध का यही मनःशास्त्र है। जिस दूरबीन से उस युद्ध का स्पष्ट एवं सत्य स्वरूप दिखेगा, ऐसी खरी दूरबीन अर्थात्ं धर्म हेतु मरें, मरते हुए सारों को मारें, मारते-मारते जीतें राज्य अपना।
इस दूरबीन से उस क्रांति की ओर देखें तो कितना अलग
1857 का स्वातंत्र्य समर - 41
धर्म हेतु मरें, मरते हुए सारों को मारें;
मारते-मारते जीतें, राज्य अपना।
सन् 1857 के क्रांतियुद्ध का यही तात्त्विक कारण है। इस क्रांतियुद्ध का यही मनःशास्त्र है। जिस दूरबीन से उस युद्ध का स्पष्ट एवं सत्य स्वरूप दिखेगा, ऐसी खरी दूरबीन अर्थात्ं धर्म हेतु मरें, मरते हुए सारों को मारें, मारते-मारते जीतें राज्य अपना।
इस दूरबीन से उस क्रांति की ओर देखें तो कितना अलग