दृश्य दिखने लगता है! स्वधर्म एवं स्वराज्य-इन दो पवित्र कारणों से जो क्रांतियुद्ध लड़ा गया उसकी पवित्रता पराजय से भंग नहीं होती। गुरू गोविंद सिंह के प्रयास तादृश रीति से विफल रहे, इस कारण उसका दिव्यत्व कम नहीं होता। या सन् 1857 में इटली में राज्य क्रांति की जो विशाल लहर उठी उसमें उस क्रांति के नेताओं की संपूर्ण पराजय हुई, इस कारण उनके हेतु का पुण्य क्षीण नहीं होता।
जस्टिन मैकार्थी ने कहा है-’’वस्तुस्थिति
दृश्य दिखने लगता है! स्वधर्म एवं स्वराज्य-इन दो पवित्र कारणों से जो क्रांतियुद्ध लड़ा गया उसकी पवित्रता पराजय से भंग नहीं होती। गुरू गोविंद सिंह के प्रयास तादृश रीति से विफल रहे, इस कारण उसका दिव्यत्व कम नहीं होता। या सन् 1857 में इटली में राज्य क्रांति की जो विशाल लहर उठी उसमें उस क्रांति के नेताओं की संपूर्ण पराजय हुई, इस कारण उनके हेतु का पुण्य क्षीण नहीं होता।
जस्टिन मैकार्थी ने कहा है-’’वस्तुस्थिति