1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ब्रिटिश सरकार की आंखों में धूल झोंककर इस पांडुलिपि की अनेक


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देशों में यात्रा, प्रकाशन और प्रकाशन पूर्व प्रतिबंध की रोमांचकारी कहानी हमें 10 जनवरी, 1947 को बंबई से प्रकाशित प्रथम अधिकृत संस्करण में मराठी साप्ताहिक ‘अग्रणी’ के संपादक श्री जी.एम.जोशी की कलम से तथा दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षित फाइलों में मिलती है। जी.एम.जोशी लिखते हैं कि ‘‘सावरकर ने अपनी पहली रचना ‘मेजिनी का चरित्र’


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ब्रिटिश सरकार की आंखों में धूल झोंककर इस पांडुलिपि की अनेक


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देशों में यात्रा, प्रकाशन और प्रकाशन पूर्व प्रतिबंध की रोमांचकारी कहानी हमें 10 जनवरी, 1947 को बंबई से प्रकाशित प्रथम अधिकृत संस्करण में मराठी साप्ताहिक ‘अग्रणी’ के संपादक श्री जी.एम.जोशी की कलम से तथा दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षित फाइलों में मिलती है। जी.एम.जोशी लिखते हैं कि ‘‘सावरकर ने अपनी पहली रचना ‘मेजिनी का चरित्र’


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