1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

रोहिलखंड और बंगाल में वे बीज बोए तो वेलेजली ने मैसूर, आसई, पुणे, सतारा एवं उत्तरी हिंदुस्थान की उपजाऊ भूमि में उसकी बुआई की। इस बुआई में उन्हें कुछ भी कष्ट नहीं हुए, ऐसा नहीं है। तलवार और तोपों से हिंदुस्थान की भूमि जोतनी पड़ी। क्योंकि अन्य किन्हीं ऐरे-गैरे हलों को श्री वर्धन के परकोटे, शनिवार के बाड़े, सहृादि के टीले, आगरा के बुर्ज और दिल्ली के भरी सिंहासन दाद न देते। इस पथरीली भूमि पर हल चलाकर उन्हें


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रोहिलखंड और बंगाल में वे बीज बोए तो वेलेजली ने मैसूर, आसई, पुणे, सतारा एवं उत्तरी हिंदुस्थान की उपजाऊ भूमि में उसकी बुआई की। इस बुआई में उन्हें कुछ भी कष्ट नहीं हुए, ऐसा नहीं है। तलवार और तोपों से हिंदुस्थान की भूमि जोतनी पड़ी। क्योंकि अन्य किन्हीं ऐरे-गैरे हलों को श्री वर्धन के परकोटे, शनिवार के बाड़े, सहृादि के टीले, आगरा के बुर्ज और दिल्ली के भरी सिंहासन दाद न देते। इस पथरीली भूमि पर हल चलाकर उन्हें


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