1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्वतंत्रता और गुलामी के झगड़े में अंतिम जय स्वतंत्रता की ही होती है।’’

सीले कहता है-‘‘अंगे्रजों का हिंदुस्थान से संबंध प्रकृति से मजाक है। इन दो देशों में किसी तरह का प्राकृतिक बंधन नहीं है। उनका रक्त भिन्न है।’’ पर यह सब भूलकर जिस वर्ष क्लाइव ने स्वार्थ और अन्याय का साम्राज्य स्थापित करने के लिए प्लासी के मैदान पर रक्त-मांस की नींव रखी उस सन् 1687 के ही वर्श इस क्रांतियुद्ध के बीज कहां-कहां नहीं बोए? हेस्टिंग ने काशी,


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स्वतंत्रता और गुलामी के झगड़े में अंतिम जय स्वतंत्रता की ही होती है।’’

सीले कहता है-‘‘अंगे्रजों का हिंदुस्थान से संबंध प्रकृति से मजाक है। इन दो देशों में किसी तरह का प्राकृतिक बंधन नहीं है। उनका रक्त भिन्न है।’’ पर यह सब भूलकर जिस वर्ष क्लाइव ने स्वार्थ और अन्याय का साम्राज्य स्थापित करने के लिए प्लासी के मैदान पर रक्त-मांस की नींव रखी उस सन् 1687 के ही वर्श इस क्रांतियुद्ध के बीज कहां-कहां नहीं बोए? हेस्टिंग ने काशी,


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