क्रांतियुद्ध निश्चित हो गया था। केवल शेष रहा तिथि निर्णय, वह मैटरनिख के जुल्मों से हो गया। उसी तरह जिस समय आंग्ल भूमि हिंद भूमि पर दासता लादने के लिए किसी राक्षस की तरह दौड़कर आई उसी दिन अंगे्रजों और हिंदुओं का जो भयंकर, क्रूर और घमासान युद्ध होना है, यह तय हो गया; केवल उसका आरंभ कब हो, यह डलहौजी ने तय कर दिया। डलहौजी के शासनकाल में हुए अमानुशी अन्याय कुछ सीमा तक नरम भी हुए होते तो भी उसके कारण अंतिम संग्राम टल नहीं सकता था,
क्रांतियुद्ध निश्चित हो गया था। केवल शेष रहा तिथि निर्णय, वह मैटरनिख के जुल्मों से हो गया। उसी तरह जिस समय आंग्ल भूमि हिंद भूमि पर दासता लादने के लिए किसी राक्षस की तरह दौड़कर आई उसी दिन अंगे्रजों और हिंदुओं का जो भयंकर, क्रूर और घमासान युद्ध होना है, यह तय हो गया; केवल उसका आरंभ कब हो, यह डलहौजी ने तय कर दिया। डलहौजी के शासनकाल में हुए अमानुशी अन्याय कुछ सीमा तक नरम भी हुए होते तो भी उसके कारण अंतिम संग्राम टल नहीं सकता था,