क्योंकि प्रत्येक देश स्वतंत्र रहे, यही प्राकृतिक दर्शनशास्त्र का अबाधित रहने वाला अंतिम सिद्धांत है। इस प्रकृति-हेतु के विरूद्ध कोई राष्ट्र के पैरों में बलपूर्वक गुलामी की बेड़ियां, फिर भले ही वे सोने से मढ़ी क्यों न हों, डाल दे तो काल के घन प्रहार के नीचे उनके टुकड़े होना निश्चित है। तथापि जहां-जहां गुलामी होती है वहां-वहां अत्याचार होना स्वाभाविक है और जहां-जहां फिरंगी शासन है वहां-वहां डलहौजी आने ही चाहिए,
क्योंकि प्रत्येक देश स्वतंत्र रहे, यही प्राकृतिक दर्शनशास्त्र का अबाधित रहने वाला अंतिम सिद्धांत है। इस प्रकृति-हेतु के विरूद्ध कोई राष्ट्र के पैरों में बलपूर्वक गुलामी की बेड़ियां, फिर भले ही वे सोने से मढ़ी क्यों न हों, डाल दे तो काल के घन प्रहार के नीचे उनके टुकड़े होना निश्चित है। तथापि जहां-जहां गुलामी होती है वहां-वहां अत्याचार होना स्वाभाविक है और जहां-जहां फिरंगी शासन है वहां-वहां डलहौजी आने ही चाहिए,