1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में जहां खुली स्पर्धा शुरू होती है वहां डलहौजी ही पैदा होंगे। अनीति-मूलक साम्राज्य जहां-जहां बढ़े वहां वहां ऐसे डलहौजियों के जंगल ही देश रहे।

पर इन सब डलहौजियों को पीछे छोड़ देनेवाला एक आंग्ल डलहौजी सन् 1848 में भारत आया। डलहौजी को अंगे्रज इतिहासकार ‘साम्राज्य का प्रणेता’ कहते हैं ’इस बात से अलग डलहौजी के अधम और नीच कर्मों के लिए अन्य किसी साक्ष्य की आवश्यकता ही नहीं है। सौ वर्ष तक चलाई गई अंगे्रजी अनीति का मूर्त परिणाम,


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में जहां खुली स्पर्धा शुरू होती है वहां डलहौजी ही पैदा होंगे। अनीति-मूलक साम्राज्य जहां-जहां बढ़े वहां वहां ऐसे डलहौजियों के जंगल ही देश रहे।

पर इन सब डलहौजियों को पीछे छोड़ देनेवाला एक आंग्ल डलहौजी सन् 1848 में भारत आया। डलहौजी को अंगे्रज इतिहासकार ‘साम्राज्य का प्रणेता’ कहते हैं ’इस बात से अलग डलहौजी के अधम और नीच कर्मों के लिए अन्य किसी साक्ष्य की आवश्यकता ही नहीं है। सौ वर्ष तक चलाई गई अंगे्रजी अनीति का मूर्त परिणाम,


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