क्योंकि बिना अत्याचार के जिस तरह गुलामी असंभव है उसी तरह बिना डलहौजी फिरंगी राज्य असंभव बात है।
विदेशियों पर अपना अन्यायमूलक शासन चलाना जहां सर्वसम्मत हो, वहां अपने शासन में जो सर्वाधिक क्रूर होगा उसे ही श्रेश्ठ माना जाएगा-अर्थात् जो जितना ही
1857 का स्वातंत्र्य समर - 46
अन्यायी है उसे उस अन्याय का कमाल दिखाने के सिवाय अपना श्रेष्ठतम बनाए रखने की दूसरी कोई युक्ति नहीं बचती। इस तरह अन्याय और अधमता
क्योंकि बिना अत्याचार के जिस तरह गुलामी असंभव है उसी तरह बिना डलहौजी फिरंगी राज्य असंभव बात है।
विदेशियों पर अपना अन्यायमूलक शासन चलाना जहां सर्वसम्मत हो, वहां अपने शासन में जो सर्वाधिक क्रूर होगा उसे ही श्रेश्ठ माना जाएगा-अर्थात् जो जितना ही
1857 का स्वातंत्र्य समर - 46
अन्यायी है उसे उस अन्याय का कमाल दिखाने के सिवाय अपना श्रेष्ठतम बनाए रखने की दूसरी कोई युक्ति नहीं बचती। इस तरह अन्याय और अधमता